Testo Waqt - Tarun.
Testo della canzone Waqt (Tarun.), tratta dall'album Waqt
कल जहाँ बस्ती थी खुशियाँ, आज हैं मातम वहाँ
वक़्त लाया था बहारें, वक़्त लाया है खिज़ा
वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज
वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज
वक़्त की गर्दिश से है, चाँद तारों का निज़ाम
वक़्त की ठोकर में है, क्या हुकूमत क्या समाज
वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज
वक़्त की पाबंद हैं, आती जाती रौनकें
वक़्त है फूलों के सेज, वक़्त है काँटों का ताज
वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज
आदमी को चाहिए, वक़्त से डर कर रहे
कौन जाने किस घड़ी, वक़्त का बदले मिजाज़
वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज
Credits
Writer(s): Tarun Kukreja
Lyrics powered by www.musixmatch.com
Link
Disclaimer:
i testi sono forniti da Musixmatch.
Per richieste di variazioni o rimozioni è possibile contattare
direttamente Musixmatch nel caso tu sia
un artista o
un publisher.